ज़िक्र और तज़किया
हर रोज़ अल्लाह की याद से दिल को रोशन करना, नफ़्स को पाक करना और रूह को चैन देना।
यह दरगाह-ए-मोहब्बत दिलों को जोड़ने, इंसानियत की ख़िदमत करने और हर कदम पर सब्र व शुक्र की तालीम देने के लिए समर्पित है।
हमारे रूहानी पेशवा
ईलाही बाहुर्मते राज़ो नियाज़ हज़रत शेख मोहम्मद आदिल शाह क़ादरी अल-चिश्ती इफ्तेखार सरकार पीर साबिर अफी अन्हु ।
सुफ़ी तालीम का मकसद सिर्फ़ इल्म नहीं, बल्कि दिल की सफ़ाई, अख़लाक़ की खूबसूरती और अमल में इंसानियत लाना है।
हर रोज़ अल्लाह की याद से दिल को रोशन करना, नफ़्स को पाक करना और रूह को चैन देना।
हर इंसान के साथ नरमी, अदब और रहम का व्यवहार करना ही सुफ़ी तरीक़े की पहचान है।
मदद, दुआ और सेवा के जरिए समाज में अमन और भाईचारा मजबूत करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
“जहाँ मोहब्बत होती है, वहीं दिल में नूर उतरता है, और जहाँ नूर उतरता है वहाँ इंसानियत खिल उठती है।”
साप्ताहिक व मासिक सभाएँ, दुरूद-ओ-अज़कार और तालीमी बैठकों के जरिए हर उम्र के लोगों को रूहानी मार्गदर्शन दिया जाता है।
शाम 7:30 बजे - महफ़िल-ए-ज़िक्र
कुरआन तिलावत, वाज़ और सामूहिक दुआजुमा के बाद - रूहानी नसीहत
युवा और परिवार के लिए खास तालीमी सत्ररात 9:00 बजे - ख़ुसूसी फ़ातिहा
अमन, बरकत और सेहत के लिए सामूहिक दुआअगर आप रूहानी मार्गदर्शन, दुआ या महफ़िल में शामिल होना चाहते हैं तो नीचे दिए गए माध्यम से संपर्क करें।
पीर आदिल ट्रस्ट, मुख्य रूहानी केंद्र
आपका शहर, आपका जिला, भारत
मोबाइल: +91 84217 35588
ईमेल: info@peeradiltrust.in
रोज़ाना सुबह 9:00 से दोपहर 1:00 तक
शाम 5:00 से रात 9:00 तक
अपना नाम और मसअला व्हाट्सऐप पर भेजें। महफ़िल में सामूहिक दुआ की जाएगी।